सेरोगेसी बिल क्या है ?अब इसमें कौन से स्पीडब्रेकर डाल दिए गए है ?

सरोगेसी को एक सामान्य बोलचाल की भाषा मे हम बोल सकते है किराए की कोख लेना ,ये निसंतान लोगो के लिए ये एक बेहतरीन चिकित्सा विकल्प है जिसके माध्यम से कोई भी संतान की खुशी हासिल कर सकता है इसकी जरूरत तब पड़ती है जब किसी स्त्री को गर्भाशय का संक्रमण हो या फिर किसी अन्य कारण से गर्भ धारण करने में सक्षम ना होती या पुरुष में कोई समस्या हो

सरोगेसी दो प्रकार की होती है -एक तो होती है कमर्शियल सेरोगेसी मतलब की पैसा लेकर तब सरोगेट करना और दूसरी होती है altruistic सरोगेसी मतलब की कह सकते है परोपकारी सरोगेसी ।

प्रक्रिया-इसमे माता और पिता के अंडाणुओं व शुक्राणुओं का मेल परखनली विधि से करवाकर सरोगेट माता के बच्चेदानी में प्रतायरोपित कर दिया जाता है इसमे बच्चे का जेनेटिक संबंध माता पिता दोनो से होता है ।अब आते है मुख्य प्रश्न पर अभी हाल ही में जो बिल निकल कर आया है वह दूसरी वाली Altruistic सरोगेसी के लिए आया है और Commercial सरोगेसी को पूर्ण रूप से बैन करने की बात की गई है।

जो नया बिल है उसमें कुछ शर्तें लागू कर दी गई है

  • जो इसमे तीसरी महिला (सरोगेट मदर )है ये कोई क्लोज रिलेटिव होनी चाहिए (बिल में यह परिभाषित नही है कि कितना क्लोज होना चाहिए )
  • पांच साल के विवाहित निसंतान भारतीय दंपति ही इसका इस्तेमाल कर सकते है
  • माता और पिता दोनो में कोई एक बच्चा पैदा करने में
  • एक महिला केवल एक बार सरोगेट मदर बन सकती है अपनी पूरी लाइफ में
  • सरोगेट मदर पहले से विवाहित होगी और कम से कम एक स्वस्थ बच्चे को पहले जन्म दे चुकी होगी
  • जम्मू कश्मीर को छोड़कर यह कानून पूरे देश मे लागू है ।(क्योकि जम्मू कश्मीर का अपना अलग संविधान है )
  • केंद्र और राज्यो में सरोगेसी नियमन बोर्ड बनाया जायेगा
  • सभी क्लीनिकों का पंजीकरण अनिवार्य होगा
  • कानून तोड़ने वालों के लिये कम से कम 10 साल की सजा होगी और 10 लाख ₹ तक का जुर्माना लगाया जाएगा
  • इस बिल में यह भी बताया गया कि कौन इसका इस्तेमाल नही कर सकता है जैसे -अविवाहित दंपति ,सिंगल पेरेंट्स ,लिव इन पार्टनर ,विदेशी नागरिक ,भारतीय मूल के लोग अनिवासी भारतीय ,किसी भी व्यावसायिक इस्तेमाल पर पाबंदी

आखिर इस बिल की जरूरत क्यों पड़ी ?

सरोगेसी पर नए सिरे से बहस 2008 के एक केस से हुई जो मामला जापानी डॉ दंपति का था जिसने गुजरात मे एक महिला के किराए के कोख के जरिए एक बच्चे को जन्म देने का फैसला लिया लेकिन सरोगेसी के दौरान ही दोनों में तलाक हो गया ,जन्म देने वाली माँ ने भी इस बच्चे को अपनानाने से इनकार कर दिया इससे सवाल पैदा हुआ इस बच्चे का अविभावक कौन है लंबी रस्साकसी के बाद आखिर में बच्चे की नानी को सौपा गया ।यही से सरोगेसी के लिए कानून बनाने की मांग ने काफी जोर पकड़ा

पढ़ने के लिए शुक्रिया

स्रोत – The hindu में प्रकाशित एक लेख से लिया गया है !

Published by Ashish Mishra

मेरा नाम आशीष कुमार मिश्र है ,मैं दिल्ली में रहकर पिछले छह महीने से गवर्मेंट जॉब की तैयारी कर रहा हूं मेरा मूल निवास उत्तर प्रदेश के ही जौनपुर जिला है जो प्रयागराज और बनारस से सटा हुआ जिला है ,इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल और केवल मेरी अभिव्यक्ति और नैतिक मूल्यों के समझ को तराशना है ,ब्लॉग के ज्यादातर मुद्दे आसपास के जीवन में होने वाले हलचलों के उपर रहेंगे आप मुझसे जुड़े रहे , स्वस्थ रहे खुश रहे ।।

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