हिंदी माध्यम के कोचिंग संस्थान

Unmukt Udan...

नमस्कार दोस्तों,

मेरा पिछले साल सिविल सेवा में चयन हुआ, तो उसके बाद एक कोशिश थी कि आपकी मदद करूँ, कुछ की भी, पर ज्यादा नहीं कर पाया मसूरी में ट्रेनिंग की व्यस्त जिंदगी से वक्त निकालने में मैं असफल रहा, अभी भी डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग चल रही है, फिर भी अपेक्षाकृत वक्त है क्योंकि अकेला हूँ, शायद कुछ कर पाऊं| एक साल की ट्रेनिंग करने के बाद मेरे अनुभवों का विस्तार हुआ है, बाकी सफल लोगों को देखकर, उनको ऑब्ज़र्व करने के बाद मैं अपने विचार और बेहतरी के साथ रख सकता हूँ|

इस साल हिंदी माध्यम का परिणाम आया तो निराशा हुई, लेकिन मैंने देखा कुछ लोगों ने आंसू बहाये, चिंता व्यक्त की, बाकी खेल यूँ ही चलता रहा, जैसा हर साल चलता है| उसके बाद प्रीलिम्स हुआ और शायद इस बार के पेपर से सबसे ज्यादा प्रभावित हिंदी माध्यम ही हुआ है|

पहले तो मैं आपको ये खेल…

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क्रोध

स्वभाव बनाए रखें

एक बार एक गुरु और शिष्य साथ में यात्रा कर रहे थे, और वे एक छोटी सी झील के पास से गुजरे। गुरु को प्यास लग रही थी इसलिए उसने अपने शिष्य से कहा कि झील से थोड़ा पानी ले आओ।

शिष्य झील तक चला गया। जब वह वहां पहुंचा, तो उसने देखा कि ठीक उसी समय, मवेशियों का एक झुंड झील के पास से गुजरा था। नतीजतन, पानी बहुत मैला हो गया। शिष्य ने सोचा, “मैं अपने गुरु को पीने के लिए यह गन्दा पानी कैसे दे सकता हूँ!” मुझे नहीं लगता कि यह पीने लायक है। ”

लगभग आधे घंटे के बाद, फिर से गुरु ने अपने छात्र को वापस झील पर जाने और पीने के लिए कुछ पानी लाने के लिए कहा। शिष्य आज्ञाकारी रूप से झील पर वापस चला गया। इस बार भी उन्होंने पाया कि झील का पानी मैला था। उसने लौटकर गुरु को उसी के बारे में जानकारी दी।

कुछ समय बाद, फिर से गुरु ने अपने छात्र को वापस जाने के लिए कहा। शिष्य झील में पूरी तरह से साफ और साफ पानी खोजने के लिए झील पर पहुंचा। कीचड़ नीचे बैठ गया था और ऊपर का पानी पीने लायक हो गया था। इसलिए उसने एक मटके में थोड़ा पानी इकट्ठा किया और अपने गुरु के पास लाया।

गुरु ने पानी को देखा और फिर उसने शिष्य की ओर देखा और कहा, “देखो पानी साफ करने के लिए तुमने क्या किया। तुमने लंबे समय तक इंतजार किया और कीचड़ अपने आप ही शांत हो गया और तुम्हे साफ पानी मिल गया। तुम्हारा मन भी ऐसा ही है! जब यह परेशान है, तो बस रहने दो। इसे थोड़ा समय दें। यह अपने आप ही शांत हो जाएगा। इसे शांत करने के लिए आपको कोई प्रयास नहीं करना होगा। यह होगा। यह सहज है ”।

Moral: जब भी तुम क्रोधित होते हो, बस अपने आप को कुछ समय दो। आप धीरे-धीरे शांत हो जाएंगे, और फिर आप सही निर्णय ले पाएंगे।images (3)_1550940238089

स्टीफ़न हाकिंग के जन्मदिन पर विशेष

जो बातें हमें सिखा गए स्टीफन हॉकिंग!

महान वैज्ञानिक की वो बातें जो हर किसी को प्रेरणा ही नहीं दे सकतीं बल्कि जीवन बदल सकती हैं

76 साल जीने वाले स्टीफन हॉकिंग जब 21 की उम्र में एकियोट्रॉपिक लेटर्ल स्केलोराइसिस (एएलसी) बीमारी से ग्रस्त हुए तो डॉक्टरों ने कहा कि वो दो साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे. इसके बाद भी उन्होंने 55 साल और जीकर दिखाया. इस दौरान वह पूरी दुनिया में घूमे. बोल नहीं पाने के बाद भी लेक्चर दिए. ऐसे शोध किए, जिसने अंतरिक्ष को लेकर लोगों की सोच बदल डाली. उन्होंने बेस्ट सेलर किताबें भी लिखीं. वह मानवीय दिमाग की मजबूती के प्रतीक भी थे. लोग हैरान होते थे कि एक अपंग शख्स इतनी ढेर सारी चीजें कैसे कर सकता है.

मशहूर ग्रीक फिलास्फर हेरो डोट्स का कहना है, “प्रतिकूलता हमारी मजबूतियों को सामने लाती है. जब आप अपनी सबसे बड़ी चुनौती के सामने सकारात्मक होते हैं और संरचनात्मक तरीके से रिस्पांस देते हैं तो एक खास किस्म की दृढ़ता, मजबूती, साहस, चरित्र, जो आपमें ही निहित होता है. भले ही आपको उसका अहसास नहीं हो, वह आपको निखारने लगता है. ”

स्टीफन हॉकिंग के जीवन की वो बातें, जिससे हम सभी लोग सीख सकते हैं..

1. अपंगता से उबरने के लिए तकनीक का सहारा लें

इंटेलिजेंस में वो क्षमता होती है कि वो किसी भी बदलाव के साथ तालमेल बिठा ले. उन्होंने हमें बताया कि तकनीक किस तरह हमारा जीवन बदल सकती है. वह चल फिर नहीं सकते थे. बोल नहीं सकते थे. हाथ – पैर नहीं चला सकते थे लेकिन उसके बाद वो पूरी दुनिया में घूमे. कई किताबें लिखीं. तमाम लेक्चर दिए, क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्होंने तकनीक को अपनी रोजमर्रा का अनिवार्य अंग बनाया. वह एक विशेष मोटर से संचालित व्हील चेयर से मूव करते थे. व्हील चेयर से जुड़े स्पीच सिंथसाइजर से बोलते थे. व्हील चेयर से लगे कंप्यूटर मॉनिटर के जरिए बहुत कुछ समझाते थे. उन्होंने कंप्यूटर तकनीक और इंटरनेट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया.

2. अपंगता कभी राह में आड़े नहीं आती

वो हमेशा कहते थे, “मेरी सलाह विकलांग लोगों से है कि हमेशा जो आप करना चाहते हैं, उसपर ध्यान लगाएं, आपकी अपंगता आपको कभी बेहतर करने से नहीं रोक सकती. कभी अपनी स्थिति पर अफसोस मत करिए. अपने जोश को कम मत होने दीजिए.”

जब उन्हें गंभीर बीमारी हुई और डॉक्टरों से कहा कि वो दो साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे तो उन्होंने हार नहीं मानी. तब वह जेन वील्ड के प्यार में पड़े. दोनों के तीन बच्चे हुए. इसी दौरान भौतिक वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने रिसर्च भी जारी रखी. वह ठान चुके थे कि अपनी अपंगता को बाधा नहीं बनने देंगे. वह कहते थे कि सबकुछ आपके दिमाग में है.

3. हमेशा जिज्ञासु बनो

वह कहते थे- “हमेशा सितारों की ओर ऊपर देखो न कि अपने पैरों की ओर. ये सोचो कि ये दुनिया ऐसी क्यों है. ब्रह्मांड कैसे है. हमेशा जिज्ञासु बने रहो”. उनमें हमेशा एक बच्चे की तरह जिज्ञासा बनी रही. वह हमेशा सवाल पूछते थे – क्यों और कैसे.

4. हमेशा विनोदी स्वाभाव के बने रहो

स्टीफन हॉकिंग ने कहा-सक्रिय दिमाग हमेशा मेरे बने रहने की वजह रहा, इससे मैं हमेशा अपना सेंस ऑफ ह्यूमर बनाए रख सका. उन्हें जानने वाले कहते हैं कि वो हमेशा मजाकिया रहे. वह लोगों को इसके लिए अच्छे वीडियो देखने की सलाह देते थे.

5. हमेशा सिद्धांतों पर टिके रहो

“कोई फिजिक्स में प्राइज लेने के इरादे से रिसर्च नहीं करता. बल्कि इस आनंद के लिए करता है कि वो नई चीज की खोज कर रहा है, जिसके बारे में इससे पहले कोई नहीं जानता है” – स्टीफन हॉकिंग.

अपने पूरे जीवन के दौरान वह हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहा करते थे कि साइंस रिसर्च के लिए न केवल फंड कम हैं बल्कि साइंस रिसर्च और ब्रिटेन में पढ़ाई के लिए फंडिंग में कुप्रबंधन की स्थिति भी. जब उन्होंने नाइटहुड की उपाधि दी गई तो उन्होंने सिद्धांतों के आधार पर इसे ठुकरा दिया.

6. कभी हार मत मानो

ब्लैक होल पर नई थ्योरी देने से कुछ महीनों पहले उनके काम की बहुत आलोचना हो रही थी लेकिन वो डटे रहे. उन्होंने जब ब्लैक होल की रिसर्च को सामने रखा, तब भी उनकी हंसी उड़ाई गई और इसे माना नहीं गया लेकिन वो अपनी बात दृढ़ रहे. बाद में इसे सबने माना.

7. समय कीमती है, इसका उपयोग करो

वह समय को बर्बाद करने से घृणा करते थे. उन्होंने समय पर रिसर्च की थी. उन्होंने अपनी ये रिसर्च इस टिप्पणी के साथ खत्म की कि घड़ी को वापस पीछे घुमाना असंभव है. संदेश साफ था कि हम पैसा बना सकते हैं लेकिन गया हुआ समय कभी वापस नहीं लौटता, इसलिए हमें बुद्धिमानी से इसका उपयोग करना चाहिए.

8. अपनी जानकारी बांटो

वो जानकारियों के आदान प्रदान में विश्वास रखते थे. मसलन उन्होंने ये दिखाया कि फिजिक्स कोई गूढ़ विषय नहीं है बल्कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए भी उसे समझना आसान है. वह ज्ञान को बांटने में वि Continue reading “स्टीफ़न हाकिंग के जन्मदिन पर विशेष”

सेरोगेसी बिल क्या है ?अब इसमें कौन से स्पीडब्रेकर डाल दिए गए है ?

सरोगेसी को एक सामान्य बोलचाल की भाषा मे हम बोल सकते है किराए की कोख लेना ,ये निसंतान लोगो के लिए ये एक बेहतरीन चिकित्सा विकल्प है जिसके माध्यम से कोई भी संतान की खुशी हासिल कर सकता है इसकी जरूरत तब पड़ती है जब किसी स्त्री को गर्भाशय का संक्रमण हो या फिर किसी अन्य कारण से गर्भ धारण करने में सक्षम ना होती या पुरुष में कोई समस्या हो

सरोगेसी दो प्रकार की होती है -एक तो होती है कमर्शियल सेरोगेसी मतलब की पैसा लेकर तब सरोगेट करना और दूसरी होती है altruistic सरोगेसी मतलब की कह सकते है परोपकारी सरोगेसी ।

प्रक्रिया-इसमे माता और पिता के अंडाणुओं व शुक्राणुओं का मेल परखनली विधि से करवाकर सरोगेट माता के बच्चेदानी में प्रतायरोपित कर दिया जाता है इसमे बच्चे का जेनेटिक संबंध माता पिता दोनो से होता है ।अब आते है मुख्य प्रश्न पर अभी हाल ही में जो बिल निकल कर आया है वह दूसरी वाली Altruistic सरोगेसी के लिए आया है और Commercial सरोगेसी को पूर्ण रूप से बैन करने की बात की गई है।

जो नया बिल है उसमें कुछ शर्तें लागू कर दी गई है

  • जो इसमे तीसरी महिला (सरोगेट मदर )है ये कोई क्लोज रिलेटिव होनी चाहिए (बिल में यह परिभाषित नही है कि कितना क्लोज होना चाहिए )
  • पांच साल के विवाहित निसंतान भारतीय दंपति ही इसका इस्तेमाल कर सकते है
  • माता और पिता दोनो में कोई एक बच्चा पैदा करने में
  • एक महिला केवल एक बार सरोगेट मदर बन सकती है अपनी पूरी लाइफ में
  • सरोगेट मदर पहले से विवाहित होगी और कम से कम एक स्वस्थ बच्चे को पहले जन्म दे चुकी होगी
  • जम्मू कश्मीर को छोड़कर यह कानून पूरे देश मे लागू है ।(क्योकि जम्मू कश्मीर का अपना अलग संविधान है )
  • केंद्र और राज्यो में सरोगेसी नियमन बोर्ड बनाया जायेगा
  • सभी क्लीनिकों का पंजीकरण अनिवार्य होगा
  • कानून तोड़ने वालों के लिये कम से कम 10 साल की सजा होगी और 10 लाख ₹ तक का जुर्माना लगाया जाएगा
  • इस बिल में यह भी बताया गया कि कौन इसका इस्तेमाल नही कर सकता है जैसे -अविवाहित दंपति ,सिंगल पेरेंट्स ,लिव इन पार्टनर ,विदेशी नागरिक ,भारतीय मूल के लोग अनिवासी भारतीय ,किसी भी व्यावसायिक इस्तेमाल पर पाबंदी

आखिर इस बिल की जरूरत क्यों पड़ी ?

सरोगेसी पर नए सिरे से बहस 2008 के एक केस से हुई जो मामला जापानी डॉ दंपति का था जिसने गुजरात मे एक महिला के किराए के कोख के जरिए एक बच्चे को जन्म देने का फैसला लिया लेकिन सरोगेसी के दौरान ही दोनों में तलाक हो गया ,जन्म देने वाली माँ ने भी इस बच्चे को अपनानाने से इनकार कर दिया इससे सवाल पैदा हुआ इस बच्चे का अविभावक कौन है लंबी रस्साकसी के बाद आखिर में बच्चे की नानी को सौपा गया ।यही से सरोगेसी के लिए कानून बनाने की मांग ने काफी जोर पकड़ा

पढ़ने के लिए शुक्रिया

स्रोत – The hindu में प्रकाशित एक लेख से लिया गया है !

सकारात्मक सोच संग उत्साह और उल्लास लिए जीतेंगे हर हारी बाजी मन में यह विश्वास लिए ! उहापोह अटकले उलझने अवसादों का कर अवसान हो बाधाएं कितनी पथ में चेहरों पर हो बस मुस्कान ! अन्तर्मन में भरी हो ऊर्जा नयी शक्ति का हो संचार और डटकर चुनौतियों से लड़कर जीतेंगे सारा संसार ! लें संकल्प सृजन का मन में उम्मीदों से हो भरपूर धुन के पक्के उस राही से मंजिल है फिर कितनी दुर ! जगे ज्ञान और प्रेम धरा पर गूंजे कुछ ऐसा सन्देश नई चेतना से जागृत हो सूक्त पड़ा यह मेरा देश !